दुःख के समय में ये 3 बातें ज़रूर पढ़े

दुःख-तकलीफ़-दर्द ये वो चीज़े है जो इंसान को अंदर से खोखला कर देती है, लेकिन क्या आप जानते है कि दुःख और तकलीफों की शुरुआत कैसे होती है? अगर नहीं तो इस लेख हो पूरा पढ़ना, क्योंकि यह बातें आपके दुःख को दूर करने में बहुत ही मददगार साबित होगी।

भारत के पौराणिक शास्त्र बताते है कि व्यक्ति के सभी दुःखों का मुख्य कारण उसकी इच्छा है जब हमारी इच्छा बढ़ने लगती है तो लालच प्रकट होता है परन्तु दुःख और दर्द तब जन्म लेता है जब वे इच्छाएँ पूरी नहीं होती। इस संसार में कुछ ऐसी चीज़ें है तो मनुष्य के हाथ में है जबकि कुछ चीज़े हमारे बस से बाहर की है।

वर्तमान समय की बात करें तो व्यक्ति के दुःखों का कारण धन-लालच-स्त्री अथवा चिंताएँ होती है लेकिन क्या आप जानते है कि इन सभी चीज़ों का जन्म हमारी इच्छाओं में से ही हुआ है, शास्त्र बताते है कि जब व्यक्ति में इच्छाएँ खत्म हो जाती है तो ख़ुशी से अपना जीवन निर्वाह करता है परन्तु यह इच्छा ही हमारे दुःखों का मूल कारण बन बैठी है।

जब तक यह इच्छा रूपी नागिन हमारे अंदर है तब तक हमें संसार के विभिन्न दुःख अनुभव होते है, परन्तु जिस समय यह खत्म हो जाती है तब व्यक्ति को अपने आप का ज्ञान होने लगता है जैसा भगवान बुद्ध के साथ हुआ था लेकिन दोस्तों मैं आपको बुद्ध बनने के लिए नहीं कह रहा हूँ। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि जब आपकी इच्छाओं का अंत होगा तब आप उस अवस्था में चले जायेंगे, जहाँ जीवन का मूल आनंद ले सकेंगे।

3 बातें जो आपको ख़ुश कर सकती है-

  1. दुःख के समय में रोने के बजाय यह सोचो कि एकदिन आपका बुरा समय भी गुजर जाएगा क्योंकि समय हमेशा बदलता रहता है।
  2. मुर्ख व्यक्ति स्त्री एवं धन के लिए दुःखी होते है परन्तु यह नहीं समझ पाते, कि इस संसार की सभी चीज़े एक दिन नाश हो जाती है इंसान की वास्तविक शांति उसके भीतर छिपी होती है।
  3. खुद को किसी से कम मत समझो, तुम्हारी और दूसरों की संरचना में कोई फ़र्क नहीं है इसलिए यदि आपको अपनी मंज़िल प्राप्त होने में देरी या असफ़लता मिल रही है तो धैर्य रखों क्योंकि घर आसानी से बन जाते है परन्तु महल बनने में समय लगता है।

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