जानें कब खुलेगा ‘आपके किस्मत का ताला'

आपकी किस्मत का दरवाजा खोलने की चाबी आपके हाथों में ही है दोस्तों, लेकिन जो चीज आपको उस चाबी का उपयोग करके दरवाजा खोलने नहीं दे रही है वो है आपकी सोच आपके अंदर भरी हुई नेगेटिविटी, जो आपके हाथों में चाबी होने के बावजूद भी अपनी किस्मत का दरवाजा खोलने नहीं दे रही है।


आप जंग में उसी योद्धा की तरह है जिसके हाथ में हथियार होने के बावजूद भी वह हथियार का प्रयोग नहीं कर पा रहा है और उसे ऐसा करने से रोक रही है उसकी सोच उसके अंदर भरी हुई नेगेटिविटी।

आपने महाभारत का एक किस्सा तो सुना होगा कि जब अर्जुन दुनिया का सबसे बड़ा धनुर्धर होते हुए भी अपनी सोच के कारण हार मानने लगता है लेकिन जब कृष्ण उसकी सोच को बदलते हैं तो वह एक नया इतिहास रचता है।

दोस्तों हमारी लड़ाई हमारे रिश्तेदारों से तो नहीं, लेकिन अपने आप से है, अपनी खुद की सोच से है हमें अपनी सोच बदलना होगा और तरक्की के सारे दरवाजे खुद-ब-खुद खुल जाएंगे।

दोस्तों एक बात याद रखिएगा ऐसा सिर्फ आपके साथ नहीं हो रहा है दुनिया में सभी लोगों के साथ ऐसा होता है लेकिन आगे वही बढ़ता है जो अपनी सोच को कंट्रोल कर ले और दुनिया को समझने से पहले अपने आपको समझ जाए।

इसीलिए कहते हैं कि किस्मत के भरोसे मत बैठो क्या पता किस्मत ही तुम्हारे भरोसे बैठी हो, किस्मत हमसे स्वयं कह रही है कि अपने हाथों में रखी हुई चाबी को यूज करो और खोलो तरक्की के सारे दरवाजे।

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