90% लोग नहीं जानते है भारतीय टॉयलेट से जुड़ी ये सच्चाई, आप जरूर जान लें

वर्तमान में लोग इंडियन टॉयलेट सिस्टम की बजाय वेस्टर्न टॉयलेट सिस्टम अधिक पसंद कर रहे हैं। वेस्टर्न टॉयलेट सिस्टम उन लोगों के लिए ज्यादा लाभ है, जिन्हें पैरों और घुटनों को मोड़ कर बैठने में परेशानी होती है। वेस्टर्न टॉयलेट सिस्टम का उपयोग बुजुर्गों के लिए भी सही रहता है लेकिन इसका उपयोग कम उम्र के युवाओं के लिए ठीक नहीं होता है। जब युवा कम उम्र में ही नीचे बैठना छोड़ देंगे तो आगे चलकर उन्हें घुटनों और जोड़ों से संबंधित कई परेशानियाँ हो सकती है, और इससे और भी कई समस्याएँ होती है आज हम आपोको बताएगें की इंडियन टॉयलेट सिस्टम वेस्टर्न टॉयलेट सिस्टम की तुलना में ज्यादा बेहतर क्यों है।

पेट होता है अच्छे से साफ

भारतीय टॉयलेट पर बैठना से मलाशय पर दबाव पड़ता है, जिससे पेट अच्छी तरह से साफ हो जाता है। जब कोई इंसान वेस्टर्न टॉयलेट सिस्टम का उपयोग करता है तो इससे उसके मलाशय में दबाव नहीं पड़ता है, जिस कारण से पेट सही तरीके से साफ नहीं हो पाता है, जिससे व्यक्ति को कब्ज और गेन्स जैसी समस्याएं होने लगती है।

शारीरिक एक्सरसाइज होती है

भारतीय टॉयलेट का उपयोग करते समय आपको उठना बैठना पड़ता है, जिसमें आपके हाथों और पैरों का ज्यादा उपयोग होता है। उठने और बैठने से आपकी पैरों की मांसपेशियां भी विकसित रहती है।

होता है अधिक साफ

जो लोग वेस्टर्न टॉयलेट का उपयोग करते हैं वे लोग साबुन से हाथ धोने की जगह टॉयलेट पेपर का उपयोग करते हैं, इससे उनके हाथ पर बैक्टीरिया पनपने का खतरा बना रहता है, वहीं जो लोग भारतीय टॉयलेट सिस्टम का उपयोग करते हैं, वे लोग अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह से धोते हैं, जिस कारण उनका हाथ साफ रहता है।

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