पाकिस्तान में ये क्या करके चले गए सऊदी अरब के प्रिंस, मुसीबत में फंसे इमरान खान

पाकिस्तान एक ऐसा मुल्क है जिसके साथ भला कभी हो ही नहीं सकता। वह बिचारा हमेशा अपने उल्टी पुल्टी एवं अजीब हरकतों के कारण हंसी का पात्र बनता रहता है। वह जिसे दोस्त समझता है वह अपनी दोस्ती निभाता नहीं और जिससे उसकी दोस्ती जरूरी है वह उससे दोस्ती करता नहीं। सऊदी अरब की प्रिंस के स्वागत के लिए पाकिस्तान ने 4 दिन के लिए लगभग 4 करोड रुपए की 300 गाड़ियां किराए पर ली। यह वही गाड़ियां थी जिन्हें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने किफायत के नाम पर बेंच कर 18 करोड़ कमाए थे लेकिन फिर भी सऊदी अरब के प्रिंस का दिल नहीं पसीजा और वह पाकिस्तान में आग लगा कर चले गए अब पाकिस्तान उसी आग में झुलसेगा।

दरअसल सुन्नी की अधिकता वाला सऊदी अरब और शिया प्रभुत्व वाले ईरान की दुश्मनी किसी से छिपी नहीं है। दशकों से उनके रिश्ते हिंदुस्तान और पाकिस्तान के जैसे कड़वे हैं। पुलवामा में आत्मघाती हमले के बाद ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड के मुखिया ने पाकिस्तान को साफ साफ चेतावनी दिया था कि यदि वह अपनी गोद में पल रहे आतंकियों के ऊपर कार्रवाई नहीं करेगा तो ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत बदला लेने के लिए आजाद है क्योंकि ईरान की 1000 किलोमीटर लंबी सीमा पाकिस्तान से सटी हुई है जिस वजह से उसके ऊपर भी आतंकी हमलों का खतरा मंडराता रहता है।

प्रिंस ने किया आग में घी डालने का काम

पुलवामा हमले से पहले लगी सीमा पर ईरान के 27 सैनिक पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैस अल अदल के आत्मघाती हमले में मारे गए थे। पाकिस्तान के पास इसका उत्तर नहीं बचा था वह किसी तरह इससे बचता फिर रहा था कि आखिर वह क्या जवाब दें लेकिन सऊदी अरब के प्रिंस आए और पाकिस्तान की धरती से ईरान को धमकाकर कर चले गए। एक तरह से देखा जाए तो उन्होंने आग में घी डालने का काम किया। सऊदी के प्रिंस ने यहां तक कह दिया कि ईरान उग्रवाद का गढ़ हो चुका है इसके बाद जब यह खबर ईरान तक पहुंची तो वह पाकिस्तान के ऊपर ही धमकी देने का आरोप लगाने लगा और साथ ही उसने पाकिस्तान को इसका बड़ा खामियाजा भुगतने का धमकी दे दिया।
पाकिस्तानी चैनल पर हो रही चर्चा

जब पाकिस्तानी जानकारों को यह खबर पता चली तो वह हक्का-बक्का रह गए। वहां के चैनल पर भी इस बात का काफी चर्चा हो रही है कि आखिर सऊदी के प्रिंस ने पाकिस्तान मैं आकर ऐसी बात क्यों कही और भारत जाकर वहां कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के तरफ से अपना मुंह तक नहीं खोला। कुल मिलाकर पाकिस्तान जितना अच्छा बनने की कोशिश कर रहा है वह उतना ही मुसीबत में फंसते जा रहा है।

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