ट्रम्प के तंज का भारत ने दिया जवाब, अफगानिस्तान नहीं भेजेंगे सैनिक, जारी रहेगी मदद

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रधानमंत्री के खिलाफ तंज कसा था। ट्रम्प ने कहा था कि भारत ने अफगानिस्तान में कुछ खास रोल नहीं निभाया। जिस देश में युद्ध चल रहा हो वहां लाइब्रेरी बनाने का क्या फायदा।

भारत ने ट्रंप के तंज का जवाब दिया है। भारत ने कहा है कि वह अफगानिस्तान में अपने सैनिकों को नहीं भेजेगा। युद्ध की विभीषिका झेल रहे देश को मदद जारी रहेगी।

ट्रम्प चाहते हैं भारत भेजे सैनिक

अमेरिकी राष्ट्रपति अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को निकालना चाहते हैं। एक दशक तक तालिबान से लड़ने के बाद भी अमेरिका को अफगानिस्तान में स्पष्ट जीत नहीं मिली। आधे से अधिक अफगानिस्तान पर आज भी तालिबान का कब्जा है।

अमेरिकी सैनिक लगातार मारे जा रहे हैं। अमेरिका की पुरानी मांग है कि भारत अफगानिस्तान की सुरक्षा में अपना रोल निभाए। इसका मतलब है कि भारत अपने पड़ोसी देश में सैनिक भेजे। भारत इससे इनकार करता रहा है।

भारत का कहना है कि वह अपने सैनिक अफगानिस्तान नहीं भेजेगा। इसकी जगह भारत अफगानिस्तान में विकास कार्य को मदद देगा। वहां शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्र में योगदान देगा ताकि युद्ध झेल रहे लोगों को मानवीय सहायता पहुंचाई जा सके।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार भारत ने अफगानिस्तान में विकास कार्यों के लिए तीन बिलियन डॉलर खर्च किया है। अफगानिस्तान का संसद भवन भारत ने बनाया है। भारत अफगानिस्तान में स्कूल और कॉलेज बनाने में भी मदद कर रहा है। इसके साथ ही अफगानिस्तान के हजारों छात्र को भारत आकर पढ़ने के लिए स्कॉलरशिप दी जाती है।

अफगानिस्तान में सैनिक नहीं भेजना है अच्छा फैसला

दूसरे देश में अपने सैनिक भेजने के संबंध में भारत का रुख साफ है। भारत सिर्फ संयुक्त राष्ट्र संघ के मिशन में अपने जवानों को भेजता है। भारत ने न इराक में अपने सैनिक भेजे और न अफगानिस्तान में। अफगानिस्तान के लोग यह कतई पसंद नहीं करते कि दूसरे देश का सैनिक आए। सैनिक भेजने की जगह मानवीय सहायता पहुंचाने के चलते अफगानिस्तान में भारत की बहुत अच्छी इमेज है।

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