मृत व्यक्ति के नाक और कान में क्यों डाली जाती है रुई वजह कर सकती है आपको हैरान

मौत एक सार्वभौमिक सत्य है, जिसने भी इस संसार में जन्म लिया है उसकी मृत्यु भी निश्चित है। मौत को लेकर हर धर्म में अपने अलग विश्वास और मान्यताएं हैं। हिन्दू धर्म की बात की जाए पुराणों में मौत का ज़िक्र कई जगह आया है। गरुण पुराण में कहा गया है कि जब किसी व्यक्ति को मृत्यु आने वाली होती है तो यमराज उन्हें कुछ संकेत देते हैं। यमराज के दो दूत मरने वाले व्यक्ति के पास आते हैं और केवल पापी मनुष्य को ही यम के दूतों से दर लगता है। अच्छे कर्म करने वाले मनुष्य को अपनी मृत्यु के समय अपने सामने दिव्य प्रकाश दिखाई देता है और उसे मृत्यु से डर नहीं लगता।

आपने देखा होगा कि जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो मृत्यु के बाद उस मृत व्यक्ति के नाक और कान में रुई डाल दी जाती है। लेकिन ऐसा क्यों किया जाता है, क्या आप इसका कारण जानते हैं? अगर नहीं जानते हैं तो आज इसका कारण हम आपको बताने वाले हैं।

दरअसल वैज्ञानिकों ने एक सिद्धांत में बताया है कि मृत शरीर के कान और नाक में रुई इसलिए डाली जाती है ताकि उसमें कीटाणु अंदर न जा सकें। अगर कान और नाक रुई से बंद होंगे तो उसमें कीटाणु प्रवेश नहीं कर पाएंगे ऐसा वैज्ञानिकों का मानना है। लेकिन अब यहां सवाल यह उठता है की मृत शरीर का कीटाणुओं से क्या लेना देना है? जब एक बार व्यक्ति ने शरीर को त्याग दे दिया है तो उसको कीटाणुओं से क्या फर्क पड़ता है?

लेकिन असल में देखा जाए तो इसके और भी बहुत से कारण हो सकते हैं। और इन कारणों के आधार पर कान और नाक में रुई डालने को सही ठहराया जा सकता है।

इन कारणों से मृतक के नाक और कान में डाली जाती है रुई

मृत व्यक्ति के नाक और कान में रुई डालने का पहला कारण यह है कि मर जाने पर मनुष्य के शरीर से एक द्रव निकलता है और उसी द्रव को रोकने या सोखने के लिए रुई का इस्तेमाल किया जाता है। और एक और कारण बताया गया है। हिन्दू धर्म के गरुण पुराण में इस बात का उल्लेख है कि मनुष्य के मर जाने पर शरीर के खुले अंगों में सोने का कण रखा जाता है जिसे तुस्स कहते हैं। इसे शरीर के नौ अंगों में रखा जाता है और उन नौ अंगों में नाक, कान, आँख, मुंह समेत कुछ अन्य अंग भी शामिल होते हैं। सोना बहुत पवित्र माना जाता है इसलिए इसे शरीर के खुले हिस्सों में रखा जाता है।

ऐसा माना जाता है कि यदि सोने को शरीर के अलग -अलग अंगों में रख दिया जाए तो मृतक की आत्मा को शांति मिलती है। इसके अलावा उसके सभी पापों का भी नाश हो जाता है। लेकिन कान और नाक के छिद्र बड़े हैं इसलिए इसमें सोने का टुकड़ा नहीं डाला जाता है। ऐसा करने से टुकड़ा कान और नाक में गिरने का खतरा रहता है। इसलिए इसमें सोने के टुकड़े के बजाये रुई डाली जाती है।

तो यही कारण है की मृत व्यक्ति के कान और नाक में रुई डाली जाती है। एक तो मृत व्यक्ति के कान और नाक से द्रव निकलता है जिसको सोखने के लिए रुई का इस्तेमाल किया जाता है। और दूसरा कि गरुण पुराण के मुताबिक मृत व्यक्ति के खुले अंगों में सोना रखना चाहिए क्यूंकि सोने को बहुत पवित्र माना जाता है, और उससे मरे हुए व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है और उसके सभी पाप नाश हो जाते हैं, लेकिन चूँकि नाक और कान का छेद बड़ा होता है जिसमें सोने के टुकड़े अंदर जा सकते हैं इसलिए मरे हुए व्यक्ति के नाक और कान में रुई डाल दी जाती है, जिससे सोने का टुकड़ा कान और नाक के छेद के अंदर नहीं जाएगा।

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