नमाज़ तो बहाना है, मुसलमान निशाना है

गुरुग्राम से होता हुआ मामला नोएडा तक आ पहुंचा है. गुड़गांव में हिंदूवादी संगठनों ने जुमा की नमाज को लेकर एतराज जताया था और उसके बाद विवाद पनपा था. अब जुमे की नमाज का विवाद नोएडा आ पहुंचा है. सवाल यह उठने लगे हैं कि नमाज को केंद्र में रख कर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में मुसलमान कामगारों को तंग कर नौकरी छीनने की यह साजिश तो नहीं है. नमाज तो बहान भर है, लेकिन दरअसल आर्थिक रूप से मुसलमानोंको कमजोर करना है. यह एक पक्ष हो सकता है. क्योंकि मामले के इस पक्ष पर चर्चा न के बराबर हो रही है. घूम-फिर कर मामला नमाज पर पाबंदी पर आकर खत्म हो जाती है. लेकिन नमाज के बहाने उन्हें बेरोजगार करने की साजिश पर बात की ही नहीं जा रही है. नोएडा में नमाज पर पाबंदी लगाने के लिए अपनी दलीलें दी जा रहीं हैं.

ठीक है, सरकारी जमीन पर नमाज नहीं पढ़ी जानी चाहिए. पाबंदी लगानी चाहिए. लेकिन सिर्फ नमाज पर नहीं. हर मजहबी कार्यक्रम पर पाबंदी लगनी चाहिए. इस मुल्क में करोड़ों मठ-मंदिर सरकारी जमीनों पर जबरन कब्जा कर के बनाए गए हैं. सरकार को उन पर भी कार्रवाई करनी चाहिए. गोहत्या को लेकर सरकार जिस तरह दोहरा रवैया अपना रही है उसी तरह धार्मिक आजादी पर भी अपना रही है. बूचड़खानों पर पूरी तरह से रोक लगाने का कानून सरकार लाने से कतरा रही है और गोकशी का सवाल उठाती रही है. गोकशी पर पूरी तरह पाबंदी लगनी चाहिए और निर्यात पर भी पाबंदी लगा देनी चाहिए. ठीक उसी तरह नमाज पर भी पाबंदी लगे. सड़कों पर नमाज पढ़ने से रोक दिया जाना चाहिए लेकिन सड़कों पर किसी भी तरह की मजहबी काम की इजाजत नहीं देनी चाहिए. न आरएसएस का शाखा लगे, न जलूस निकले, न जागरण हो और न सड़कों को रोक कर प्रतिमाएं बैठाई जाएं. सिर्फ नमाज पर पाबंदी लगाने से सवाल तो उठेंगे ही.

फिलहाल तो इसे समझना मुश्किल है कि किस कानून के तहत ऐसा किया जा रहा है. नमाज पर पाबंदी लगाने का कानून फिलहाल कहीं है नहीं. दिलचस्प यह है कि ऐसा उन राज्यों में ही हो रहा है, जहां भाजपा की सरकारें हैं. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हरियाणा, यूपी के कुछ हिस्से आते हैं और इन दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है. नोएडा के पुलिस अधीक्षक अजय पाल का कहना है कि कुछ लोगों ने सेक्टर 58 के पार्क में नमाज पढ़ने की अनुमति मांगी थी. सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से अनुमति न मिलने के बाद भी लोग वहां इकट्ठा हो रहे थे. इलाके की कंपनियों को इस बारे में बता दिया गया है. यह सूचना किसी धर्म विशेष के लिए नहीं है. यह शास्त्रीय जवाब है जबकि हम जानते हैं कि कांवड़ यात्रियों पर यूपी पुलिस हेलिकॉप्टर से फूल बरसाती है. दिलचस्प यह है कि जिस सेक्टर 58 में नमाज रोकने पर पाबंदी लगाई गई है, वहां नमाज पांच साल से जुमे के दिन पढ़ी जाती है लेकिन पुलिस की नींद अब टूटी. अब टूटी तो उसके कुछ कारण रहे होंगे.

कुछ महीने पहले फरीदाबाद में इस पर विवाद हुआ, फिर गुड़गांव में भीड़ ने मुसलमानों को पार्क में नमाज पढ़ने से रोका और अब नोएडा में तो पुलिस ने ही बाकायदा नोटिस देकर कंपनियों से कहा है कि उनके कर्मचारी खुले में नमाज पढ़ते पाए गए तो कंपनियों पर कार्रवाई होगी. नोएडा में काम कर रही तमाम बड़ी कंपनियां पुलिस के इस नोटिस से सकते में हैं. मल्टीनेशनल कंपनी अडोबी इंटरनेशनल, सैमसंग से लेकर भारतीय कंपनियां एचसीएल, एल्सटाम, मिंडा हफ वगैरह इसे लेकर परेशानी में आ पड़ी हैं कि वे कर्मचारियों की फ़ैक्टरी या दफ़्तर के बाहर की किसी गतिविधि को कैसे नियंत्रित कर सकती हैं.

इसी साल

अगस्त में गुरुग्राम के बसई गांव में एक खाली पड़े प्लॉट पर नमाज पढ़ने वालों से कुछ लोग झगड़ा करने आ गए. पुलिस ने किसी तरह बीच-बचाव तो किया पर नमाजियों को आइंदा उस प्लॉट पर नमाज पढ़ने से रोक दिया. नमाजी दूसरे प्लॉट के मालिक से बातचीत कर वहां नमाज पढ़ने लगे तो उन्हें वहां भी रोकने की कोशिश हुई. विवाद हुआ और दंगा होते-होते बचा. पुलिस ने नमाज पढ़ने से रोकने वालों को तो कुछ नहीं कहा, नमाजियों को ही फिर कहीं और जाने को कहा.

कई महीने पहले फरीदाबाद में बिलकुल इसी तरह का विवाद हुआ था. दरअसल भाजपा के शासन वाली राज्य सरकारों पर आरोप है कि वे किसी न किसी रूप में हिंदू-मुसलिम विवाद के मसलों को चर्चा में बनाए रखना चाहती हैं. इससे, तबाह होते छोटे व मध्यम व्यापार और क़ानून व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर मिल रही असफलता पर बहस ही नहीं होगी. साथ ही सांप्रदायिक आधार पर निरंतर बांटे जा रहे समाज को इन्हीं मामलों में व्यस्त रखा जा सकेगा जिससे यह बंटवारा और ज़्यादा होता रहे. नोएडा के मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस कप्तान ने अपनी तरह की सफाई दी लेकिन इस मामले ने भाजपा सरकार की नीयत को लोगों के सामने लाकर रख दिया है. दो दिनों तक चैनलों में इस मुद्दे पर जिस तरह से बहसें हुईं, उसने भाजपा सरकारों के एजंडे को तो पूरा कर ही डाला.

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