भगवान ने क्यों की स्त्री की रचना, जानकर हो जाएंगे हैरान

आप सभी को बता दें, कि स्त्री की रचना करने से पूर्व भगवान अपने देवदूत से पूछ रहे थे, कि स्त्री में कौन कौन से गुण होने चाहिए। इसीलिए इन दोनों ने मिलकर ऐसी सारणी बनाई जिसमें स्त्री में ऐसे गुण भरे गए, जिसमें बड़े से बड़े दुख को भी सहन करते हुए मुस्कुराकर परिवार संभाल सके। स्त्री में आत्मविश्वास के गुण कूट कूट के भरे गए थे, स्त्री में ममता का गुण तथा अपने बच्चों की देखभाल अच्छे से कर सके तथा अपने भाई बहन के प्रति प्रेम बनाके रखे। स्त्री में पवित्रता का गुण भी भरा गया था, ताकि वह अपने पति को हमेशा खुश रख सके।

स्त्री का शरीर बनकर तैयार हुआ, तो देवदूत ने उसे छूकर देखा और प्रभु से कहा, कि भगवान यह तो बिल्कुल ही कोमल है। इस पर प्रभु ने मुस्कुरा कर कहा, कि देवदूत ये जितनी कोमल है लेकिन इसके अंदर अताह शक्तियां उपार्जित की गई है। परंतु जब यह अपने असली रूप में आ जाए तो, धरा को भी हिला देगी।
श्री कृष्ण ने भागवत गीता में कहा है, कि जो स्त्री का तिरस्कार करेगा उसे सैकड़ों वर्षो तक नरक की आग में जलना होगा। किसी बेबस और लाचार स्त्री का भूल कर भी तिरस्कार ना करें। दूसरों की बेसहारा बहन बेटियों को छेड़ने से पहले अपने गिरेबान में झांक ले।

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